Recomienda este artículo a tus amigos:
Maun Kinare Jitender Jayant
Maun Kinare
Jitender Jayant
जितेनà¥à¤¦à¥à¤° जयनà¥à¤¤ सन 1994 से शिकà¥à¤·à¤¾ के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में पà¥à¤°à¤¾à¤§à¥à¤¯à¤¾ पक के पद पर कारà¥à¤¯ कर रहे हैं। नितà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¤à¤¿ बाल à¤à¤µà¤‚ यà¥à¤µà¤¾ मन से उनका साकà¥à¤·à¤¾à¤¤à¥à¤•ार होता रहता है। सामाजिक सरोकारों से रूबरू पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• नागरिक की तरह से उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€ होना होता है। कà¥à¤› बातें दिल में रह जाती है, कà¥à¤› दिमाग में कोलाहल के रूप में विदà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¨ रहती हैं। आज के दौर में उपà¤à¥‹à¤•à¥à¤¤à¤¾ वादी व उनà¥à¤®à¤¾à¤¦à¥€ संसà¥à¤•ृति, सामाजिक à¤à¤µà¤‚ राज नैतिक संसà¥à¤•ृति में गिरावट के विरोध में सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के रूप में जितेनà¥à¤¦à¥à¤° जयनà¥à¤¤ की रचनाà¤à¤ अपनी सारà¥à¤¥à¤• उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ दरà¥à¤œ कराती हैं। सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• रूप से कम बोलने वाले रचनाकार अपनी संजीदगी और संवेदनाओं को अपने शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ में सारà¥à¤¥à¤• रूप पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करते हैं। यदि इन बातों पर मौन धारण रखा जाठतो कायरता होगी और मौन के à¤à¤‚वर में संवेदनाà¤à¤‚ à¤à¤• à¤à¥€à¤·à¤£ चकà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¤ में परिवरà¥à¤¤à¤¿à¤¤ हो सकती हैं। अत शबà¥à¤¦ ही हैं जो à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं को कि नारे लगाते हैं। यहीं कारण है इस पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• के सामने आने का जिसका नाम है "मौन किनारे"।
| Medios de comunicación | Libros Paperback Book (Libro con tapa blanda y lomo encolado) |
| Publicado | 5 de septiembre de 2019 |
| ISBN13 | 9781645879442 |
| Editores | Notion Press |
| Páginas | 122 |
| Dimensiones | 152 × 229 × 7 mm · 190 g |
| Lengua | Hindi |
Ver todo de Jitender Jayant ( Ej. Paperback Book )